*मेक इन इंडिया को मिलेगी नई ताकत! आरआरपी डिफेन्स भारत में ला रही है 'डायमंड' AI सर्विलांस तकनीक; इजरायली कंपनी से डील*
*मुंबई:* भारतीय रक्षा निर्माण क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की गई है। भारत की प्रमुख रक्षा निर्माण कंपनी 'आरआरपी डिफेंस लिमिटेड' और वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ऑब्जर्वेशन सिस्टम डेवलपर 'ईएससी बाज' ने हाथ मिलाया है। इस एक्सक्लूसिव पार्टनरशिप के तहत ईएससी बाज की सबसे उन्नत 'डायमंड - यूनिक ऑब्जर्वेशन सिस्टम' को भारतीय बाजार में लाया जाएगा।
*क्यों खास है 'डायमंड' तकनीक?*
यह एक नेक्स्ट-जनरेशन एआई-संचालित निगरानी प्रणाली है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह काले अंधेरे में भी दिन के उजाले जैसी बिल्कुल साफ और स्पष्ट तस्वीरें देने में सक्षम है।
* *80° फील्ड ऑफ व्यू और हाई-रिज़ॉल्यूशन:* यह तकनीक 4240 × 2832 के उच्च रिज़ॉल्यूशन और 80 डिग्री वाइड एंगल के साथ काम करती है।
* *एआई-पावर्ड डिटैक्शन:* कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से किसी भी खतरे या घुसपैठ की पहचान तुरंत और सटीक तरीके से होती है।
* *फ्लेक्सिबल डिप्लॉयमेंट:* इसे सीमा सुरक्षा, सैन्य ठिकानों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और गश्ती टॉवरों पर आसानी से तैनात किया जा सकता है।
दुनियाभर में मिलिट्री EO/IR सर्विलांस तकनीक का बाजार 2025 तक लगभग 11.1 बिलियन डॉलर (अंदाजन 90,000 करोड़ रुपये) का माना जा रहा है, जिसमें भारत का हिस्सा लगभग 580 मिलियन डॉलर का है। आरआरपी डिफेन्स के अनुसार, इस अत्याधुनिक तकनीक से उनके नए बिजनेस सेगमेंट में लगभग 30% राजस्व योगदान मिलने की संभावना है।
*'मेक इन इंडिया' से 'मेक इन इंडिया, सेल टू द वर्ल्ड'*
आरआरपी डिफेन्स के लिए यह अवसर केवल एक तकनीक को आयात करने तक सीमित नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य 'मेक इन इंडिया' के तहत भारत में ही इसका निर्माण करना, इसे स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप ढालना और यहीं से अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में निर्यात करना है।
साझेदारी पर बात करते हुए आरआरपी डिफेन्स के प्रबंधन ने कहा, "यह केवल हमारे पोर्टफोलियो में एक नया उत्पाद जोड़ने की बात नहीं है। 'डायमंड' हमें रक्षा और सुरक्षा के एक अत्यंत विशिष्ट और उन्नत क्षेत्र में प्रवेश करने का अवसर देता है। हमारा लक्ष्य भारत में निर्माण करना और इन क्षमताओं को वैश्विक बाजारों तक ले जाना है।"
बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच सीमाओं और रणनीतिक संपत्तियों की चौबीसों घंटे निगरानी अब समय की मांग बन चुकी है। ऐसे में आरआरपी डिफेन्स और ईएससी बाज का यह सहयोग भारत के रक्षा तंत्र को और अधिक मजबूत बनाएगा।




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