Sunday, November 16, 2025

आरंभ – विश्वरंग मुंबई 2025’ महोत्सव का आयोजन*


*‘आरंभ – विश्वरंग मुंबई 2025’ महोत्सव का आयोजन*

*विश्वरंग के सातवें संस्करण की सांस्कृतिक शुरुआत, भोपाल में आगामी आयोजन की घोषणा* 

मुंबई:  विश्व स्तर पर भारतीय भाषाओं, कलाओं और संस्कृति को समर्पित ‘विश्वरंग’ के सातवें संस्करण की सांस्कृतिक यात्रा की शुरुआत ‘आरंभ – विश्वरंग मुंबई 2025’ के माध्यम से मुंबई विश्वविद्यालय के ग्रीन टेक्नोलॉजी ऑडिटोरियम में हुई। दो दिवसीय इस महोत्सव ने भारतीय भाषाओं की विविधता, साहित्यिक परंपराओं और कलात्मक विरासत को केंद्र में रखते हुए विविध सत्रों और प्रस्तुतियों के माध्यम से एक जीवंत संवाद रचा। 

इस महोत्सव का उद्घाटन रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं विश्वरंग फाउंडेशन के निदेशक श्री संतोष चौबे ने किया। मंच पर डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी, डॉ. करुणा शंकर उपाध्याय, डॉ. विजय सिंह और महाराष्ट्र पुलिस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री कृष्ण प्रकाश जैसे विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। 

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. सुरुचि मेहता द्वारा मंगलाचरण से हुई, जिसने पूरे आयोजन को एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ऊर्जा प्रदान की। श्री कृष्ण प्रकाश ने भारतीय भाषाओं में निहित सांस्कृतिक पहचान को रेखांकित किया, वहीं श्री चौबे ने विश्वरंग की भूमिका को वैश्विक मंच पर भारतीय भाषाओं के संवर्धन के रूप में प्रस्तुत किया। 

भाषा, साहित्य और संवाद के विविध आयाम: महोत्सव के दौरान आयोजित सत्रों में भारतीय भाषाओं की अंतर्संवादिता, हिंदी लघुकथा का विकास और बहुभाषी कविता की समृद्ध परंपरा पर चर्चा हुई। ओम थानवी, सूर्यबाला, ए. अरविंदाक्षन और संतोष चौबे जैसे प्रतिष्ठित साहित्यकारों ने विचार साझा किए। इस अवसर पर ‘विश्वरंग संवाद’ और ‘वन्माली कथा’ के विशेष संस्करणों का लोकार्पण भी हुआ।

सांस्कृतिक कार्यक्रम और रंगमंचीय संवाद: पहले दिन मुंबई विश्वविद्यालय के परफॉर्मिंग आर्ट्स विभाग द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम ने दर्शकों को भारतीय लोक और शास्त्रीय कलाओं की विविधता से परिचित कराया। संगीत, नृत्य और नाट्य की प्रस्तुति ने आयोजन को जीवंतता प्रदान की।

रंगमंच पर केंद्रित सत्र में रंगमंच के वरिष्ठ कलाकार: वामन केंद्रे, जयंत देशमुख, प्रीता मधुर और अखिलेंद्र मिश्रा ने मंचीय शिल्प, अभिनय और स्व: हबीब तनवीर की रंग परंपरा पर संवाद किया। ‘रंग संवाद – हबीब तनवीर संस्करण’ का लोकार्पण भी इसी सत्र में हुआ।

सिनेमा और विज्ञान संचार में भाषाओं की भूमिका: सिनेमा के माध्यम से भाषाई और सांस्कृतिक विमर्श पर केंद्रित सत्र में पुरुषोत्तम अग्रवाल, अशोक मिश्रा, अनंग देसाई, रूमी जाफ़री, अजय ब्रह्मात्मज, सलीम आरिफ और छाया गांगुली जैसे प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया। इस अवसर पर ‘विश्वरंग संवाद’ का सिनेमा विशेषांक भी जारी किया गया।

विज्ञान संचार में भारतीय भाषाओं की भूमिका पर केंद्रित सत्र की अध्यक्षता श्री चौबे ने की। वक्ताओं में कृष्ण कुमार मिश्रा, मनीष मोहन गोरे, रामाशंकर, समीर गांगुली, नरेंद्र देशमुख, डॉ. कुलवंत सिंह और रीता कुमार शामिल रहे। डॉ. विनिता चौबे द्वारा संपादित ‘इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए’ का नवम्बर 2025 संस्करण भी इस अवसर पर प्रस्तुत किया गया।

धर्मवीर भारती को शताब्दी श्रद्धांजलि: धर्मवीर भारती की जन्मशताब्दी पर आयोजित विशेष सत्र में श्रीमती पुष्पा भारती, विश्वनाथ सचदेव, हरि मृदुल, हरीश पाठक और प्रो. चौबे ने उनके साहित्यिक योगदान पर विचार साझा किए। इस अवसर पर ‘गुनाहों का देवता’ के 189वें संस्करण का औपचारिक विमोचन भी हुआ।

लोक कला की थापों में शुरुआत, भोपाल में अगली भव्य प्रस्तुति की घोषणा: ‘आरंभ’ के मंच पर मुंबई विश्वविद्यालय की लोक कला अकादमी द्वारा प्रस्तुत लोकनृत्य ने सांस्कृतिक ऊर्जा का संचार किया। श्री संतोष चौबे ने अपने संबोधन में कहा कि यह कोई समापन नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है—भारतीय भाषाओं और कलाओं को लेकर एक व्यापक संवाद की। इसी क्रम में उन्होंने घोषणा की कि विश्वरंग का अगला भव्य आयोजन ‘विश्वरंग भोपाल’ 27, 28 और 29 नवम्बर 2025 को आयोजित होगा।

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